नई दिल्ली, प्रेट्र : हाल में इंटरनेट और सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने तीन-तरफा रणनीति तैयार की है। इसके तहत इंटरनेट पर आपत्तिजनक सामग्री डाले जाने से पहले ही चेतावनी देने के लिए एक साइबर निगरानी एजेंसी का गठन किया जा रहा है। हाल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन की अध्यक्षता में हुई बैठक में टेलीकॉम कंपनियों के लिए खास दिशा-निर्देश बनाने का फैसला किया गया। कंपनियों से हड़बड़ी में हुई प्रतिक्रियाओं की रोकथाम के उपाय करने को कहा जाएगा। हाल में असम हिंसा के मामले में इंटरनेट और सोशल मीडिया को अफवाह फैलाने का जरिया बनाया गया था। बैठक में कहा गया कि इस तरह की समस्याओं से निपटने के लिए समय पर चुस्त और अनुकूल प्रणाली तैयार करने की जरूरत महसूस की जा रही है। बैठक में गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय, खुफिया एजेंसियों और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में कानूनी पहलू को मजबूत करने पर जोर दिया गया। सरकार को ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी कानून में मौजूद कमियों को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। साथ ही एजेंसियों की कानूनी और वित्तीय मजबूती भी जरूरी है। बैठक के बाद गृह मंत्रालय ने इंटेलीजेंस ब्यूरो, रक्षा शोध व विकास संगठन और तीन अन्य को वेब व सोशल मीडिया पर कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री पर निगरानी रखने का आदेश दिया।
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Monday, September 17, 2012
सांप्रदायिक हिंसा फैला रहा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया: काटजू
ठ्ठ जागरण संवाददाता, लखनऊ प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू ने देश में बढ़ रहे सांप्रदायिक दंगों के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को जिम्मेदार ठहराया है। काटजू ने उन्हें दायरे में रहने की भी नसीहत दी। काटजू शनिवार को हिंदी मीडिया सेंटर, गोमतीनगर में मीडिया में बढ़ती एकाधिकारी प्रवृत्ति विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। प्रेस परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि टीआरपी और व्यवसाय के चक्कर में इलेक्ट्रॉनिक चैनल अनियंत्रित हो गए हैं। अपनी बेबाक टिप्पणी के लिए चर्चित जस्टिस काटजू ने कहा कि देश की अस्सी प्रतिशत जनता महंगाई, गरीबी, स्वास्थ्य व बेरोजगारी की समस्या से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि यदि सचिन तेंदुलकर ने सौवां शतक बना दिया तो उससे देश की बेरोजगारी खत्म तो नहीं हो गई। काटजू ने कहा कि यूपी में लोग महंगी दवाएं खरीद रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में जांच की मशीनें तक नहीं हैं, डॉक्टर प्राइवेट क्लीनिक चला रहे हैं। ऐसे में मीडिया को लोगों की समस्याओं को उजागर करना चाहिए। मीडिया पर नियंत्रण के लिए उन्होंने मीडिया काउंसिल ऑफ इंडिया बनाने की आवश्यकता पर फिर जोर दिया। इस मौके पर यूपी के राजस्व मंत्री अंबिका चौधरी ने कहा कि सामाजिक बुराइयों से सचेत करना पत्रकारों की जिम्मेदारी है। मंत्री अवधेश प्रसाद ने मीडिया के बीच बढ़ रही खाई को खत्म करने की बात कही।
Thursday, September 6, 2012
अमेरिकी अखबार का लेख अनैतिक : पीएमओ
नई दिल्ली प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को नाकाम और भ्रष्ट सरकार का मुखिया बताने वाले अमेरिकी अखबार के लेख को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने अनैतिक करार दिया है। पीएमओ की तरफ से आपत्ति जताए जाने के बावजूद वाशिंगटन पोस्ट के अपने लेख पर अड़े रहने के बाद प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इसके साथ ही संप्रग सरकार के मंत्री प्रधानमंत्री पर नीतिगत अनिर्णय की आरोपों की काट के लिए लामबंद हो गए हैं। प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज पचौरी ने खबर लिखने वाले वाशिंगटन पोस्ट के पत्रकार सिमोन डेनियर को लिखे पत्र में कहा कि हम सरकार की आलोचना की शिकायत नहीं करते, क्योंकि यह एक पत्रकार का अधिकार है। लेकिन आपकी ओर से किए गए अनैतिक व गैर पेशेवर आचरण की ओर इशारा करने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं। पचौरी ने कहा कि बातचीत के सभी रास्ते खुले होने के बावजूद आपने खबर के संबंध में हमारा पक्ष जानने की कोशिश नहीं की जबकि आप नियमित रूप से मुझसे पीएमओ की सूचनाएं लेते रहते हैं। यह लेख पूरी तरह से एकतरफा है। दरअसल, पीएमओ की तरफ से यह पत्र खबर प्रकाशित होने और फिर बाद में खंडन के मुद्दे पर हुई फजीहत के बाद भेजा गया है। बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय ने दावा किया था कि मनमोहन पर तीखी टिप्पणी के लिए अखबार ने माफी मांगी है। मगर वाशिंगटन पोस्ट ने इसे झुठला दिया। पत्र में पीएमओ ने इसका भी जिक्र किया है। पचौरी ने कहा कि मैंने जब आपको इस मुद्दे पर फोन किया तो आपने दो मर्तबा माफी मांगी। आपकी वेबसाइट नहीं चल रही थी, जिस पर हम टिप्पणी करते। इस पर 11 घंटे बाद तीसरी बार आपने सॉरी बोला। आपको साक्षात्कार के लिए मना नहीं किया गया था बल्कि मानसून सत्र तक के लिए आपके अनुरोध को ठुकराया गया था। पीएमओ की आपत्ति के बीच संजय बारू और रामचंद्र गुहा के बयान पर वाशिंगटन पोस्ट ने अपने लेख में संशोधन भी किया है। दरअसल अमेरिकी अखबार ने लेख के लिए कुछ टिप्पणियां भारतीय पत्रिका कारवां से सीधे-सीधे उठा ली थीं। हालांकि अखबार ने गलती मानी है लेकिन पत्रिका से कोई माफी नहीं मांगी है।
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